दूर-दूर से आ रहे हैं श्रद्धालु, श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर साधु डेरा (कोकदा)

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जादूगोड़ा: पोटका ब्लॉक के कोकदा आसनबनी रेलवे स्टेशन के पश्चिम केबिन से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित महाकालेश्वर मंदिर प्रभु भोलेनाथ पर श्रद्धा भक्ति एवं प्रेम का जीता जागता उदाहरण है। भोले बाबा को जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं काफी संख्या में मंदिर आ रहे हैं। यह मंदिर लगभग साढे तीन वर्ष पुराना है। मंदिर से जुड़ी अनेकों अनेक कहानियों में से एक प्राचीन कथाओं के अनुसार पास के ग्रामीण जो चरवाहक थे, अक्सर यहां गाय चराने जाते थे, गाय चारा खाकर आने के उपरांत दूध नहीं देती थी। कुछ दिन बीतने के पश्चात चरवाहा को चिंता हुई। ग्रामीणों के मन में अनेक चिंताएं प्रकट हुई। मन में कई सवाल उत्पन्न हुए। इसके पश्चात ग्रामीणों द्वारा अपने अपने गायों पर नजर रखनी शुरू कर दिया गया। इस क्रम में एक दिन लोगों ने देखा कि उनके पशुओं एक घनी झाड़ियां के बीच में वहां पड़े एक पत्थर के पास खड़ी हो जाती है। गाय के थन से अपने आप रहस्यमें तरीके से दूध निकलकर उसे पत्थर पर गिर रहा था। मौके पर मौजूद चरवाहा के समझ से बाहर था य दृश्य, धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गया। इसके बाद लोगों ने कुल्हाड़ी से पत्थर पर प्रहार किया जिससे उसमें दरार आ गई। उसी दिन मध्य रात्रि में मौके पर मौजूद चरवाहा को यह स्वप्न आया कि वह कोई मामूली पत्थर नहीं है। जिन्हें लोग पत्थर समझ रहे हैं, वह पत्थर पाताल से निकला शिवलिंग है। स्वर्गीय कालिदास के पिता स्वर्गीय फकीर चंद्र दास, के पिता स्वर्गीय तुलसी चंद्र दास, के पिता स्वर्गीय खगेन चंद्र दास ने यह सब कुछ देखा था। उसके पश्चात लोगों ने पूजा अर्चना शुरू किया और सभी ने मिलकर वहां पर मंदिर स्थापित किया। तब से आज तक सभी भक्तगण श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा करते हुए आ रहे हैं। वर्तमान में स्वर्गीय कालिदास के दो पुत्र है अशोक दास एवं शंकर दास। 350 वर्षों पहले यह पूरा इलाका “श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर” के नाम के साथ प्रसिद्ध हो गया। धीरे धीरे अनेक साधु महात्माओं ने यहां आकर रहना शुरू कर दिया। उसके उपरांत क्षेत्र साधु डेरा के नाम से भी प्रसिद्ध होने लगा। शिवलिंग पर मौजूद दरार आज भी आप देख सकते हैं। इस मंदिर में महादेव शिव एवं मां पार्वती दोनों स्थापित है। मौके पर मौजूद अजय सिंह बताते हैं कि महादेव की कृपया से मां गंगा का इस मंदिर परिसर में उद्गम है। गुप्त गंगा भी प्रकट है। यहां मौजूद गुप्त गंगा का जल कभी नहीं सूखता, भक्तगण शिवलिंग में जल चढ़ाने के लिए यहीं से जल लेते हैं। यह मंदिर कुदरा नदी के समीप समतल पर स्थित है। आस-पास का दृश्य काफी मनोरम है तथा मन को प्रफुल्लित करने वाला है। वही महेंद्र कुमार कहते हैं कि अंतरात्मा की शांति के लिए आप यहां आ सकते हैं। बाबा भोलेनाथ हर एक भक्तों का मनोकामना को पूर्ण करते हैं। सावन महीना में हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालु बाबा को जल अर्पित करने के लिए आते हैं।

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Author: Desh Live News

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