घाटशिला के नेताओं को लगा न्यूज फोबिया, दान कम पर शोर ज्यादा, झामुमो छपास रोग में अव्वल.

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उमेश कान्त गिरि

घाटशिला

सभी धर्म के मानवतावादी विचारकों ने अपने सहयोग और दान के विषय में यह विचार दिया है. कि दान और सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे एक हाथ से दान दिया जाए तो दूसरे हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए. लेकिन आज की स्थिति में घाटशिला के राजनीतिक दलों ने दान और सहायता को इस कदर घृणित कर दिया है, कि अब दान लेने वाले भी शर्माने लगे हैं. और यह कहने लगे हैं, कि मैं भूखे मर जाऊंगा, खुले आसमान में जान दे दूंगा. लेकिन इन अवसरवादी नेताओं से हमें सहयोग की और नहीं कोई अपेक्षा चाहिए।

जी हां, यह बात कर रहे हैं घाटशिला की वर्तमान राजनीतिक दलों की स्थिति की जो आज के दौर में चाहे वह सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हों या विपक्ष में बैठे भाजपा के नेता, यह सभी लोग किसी भी व्यक्ति को अगर 10 किलो चावल दे देते हैं. या ₹1000 – 2000 रुपए का तिरपाल पहुंचा देते हैं. तो अपने आप को सबसे बड़ा हितैषी, मानवतावादी, दानी या दानवीर कर्ण समझने और स्वच्छता अभियान साफ-सफाई के जनक धारी समझने लगते हैं. अभी दो दिनों पूर्व घाटशिला स्थित गोपालपुर रेलवे ब्रिज पर साफ-सफाई क्या की गई कि सभी अखबारों में फोटो और नाम आनी चाहिए. नाम और फोटो आई भी. इन नेताओं को अखबार में छपास रोग लग गया है. और ऐसा ही एक वाक्या घाटशिला के वर्तमान राजनीतिज्ञ के गलियारों में देखने को मिला. एक पीड़ित भुक्तभोगी व्यक्ति को झारखंड मुक्ति मोर्चा के द्वारा सहयोग किया गया. जिनके घर इस बारिश में तबाह हो गया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा के तथाकथित नेता और ठेकेदारों ने बमुश्किल मुक्तभोगी पीड़ित परिवार को 1000-2000 रुपयों का मदद किया होगा. लेकिन उसके बदले में उन्होंने बड़े-बड़े समाचार प्रकाशित किया. उस मदद के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के 13 कार्यकर्ताओं का हूजूम एक साथ पहुंचे. सहायता लेने वाला व्यक्ति स्वाभिमानी है, सहायता मिलने पर इस सहायता को लेकर उन्होंने अफसोस भी जाहिर किया. बड़े-बड़े ठेकेदार, साहूकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कमोवेश दल बदलू नेताओं ने एक व्यक्ति को सहायता देकर न केवल उस व्यक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाया. बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओछी राजनीति की पोल भी खोल दी है.

हजार, पंद्रह सौ से दो हजार रुपए का तिरपाल देने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के पहुंचे, वह भी 13 कार्यकर्ताओं का हूजूम ??❓

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो तथाकथित ठेकेदार और साहूकार पहुंचे और उसे अपना मानवतावादी चेहरा दिखाने का प्रयास किया. और उसे सोशल मीडिया में पोस्ट कर के जताने का प्रयास किया कि हम सबसे बड़े मानवतावादी है. लोग राजनीतिक दलों की इस क्रियाकलापों की जमकर भर्त्सना कर रहे हैं. उनका कहना है, सहायता या दान गोपनीय होना चाहिए. लेकिन वह सहायता के नाम पर स्वाभिमानी व्यक्तियों का अपमान करते आ रहे हैं. एक तिरपाल के सहयोग के लिए 13 कार्यकर्ताओं का आना अवसरवादी ठेकेदारों का पहुंचना इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है.

झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन ने भुक्तभोगी मदन विश्वास को पुर्व विधायक प्रतिनिधि जगदीश भकत द्वारा कार्यकर्ताओं के हाथों दिलाया तिरपाल.

गुरुवार को दाहीगोंड़ा निवासी मदन विश्वास का पिछले दिनों भारी बारिश की वजह से कच्चा मकान होने से क्षतिग्रस्त हो गया था. जिसके कारण परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में रहना काफी बमुश्किल हो रहा था. झामुमो नेता सोमेश चंद्र सोरेन को जब किसी कार्यकर्ता के द्वारा ऐसी सुचना मिली तो उन्होंने फौरन पूर्व विधायक प्रतिनिधि जगदीश भकत को अभिलंब तिरपाल देकर सहायता करने को कहा. जगदीश भकत ने कार्यकर्ताओं द्वारा भूक्तभोगी परिवार के घर भेजकर कार्यकर्ताओं के हाथों तिरपाल प्रदान किया गया. इस अवसर पर काला चंद सरकार, देवलाल महतों, प्रताप दास, बाबूलाल मुर्मू, सतीश सीट, सुशील मार्डी, आनन्द गोयल, सव्यसाची चौधरी, सालखान हांसदा, राजा सिंह, श्यामल साहू, सालखान सोरेन व अभिजीत विश्वास आदि उपस्थित थे.

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Author: Desh Live News

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