आस्था का एक ऐसा मंदिर जहाँ विराजती हैं शक्ति की देवी, लेकिन यहाँ का पुजारी आज तक कोई ब्राम्हण नहीं रहा, आदिवासी समाज के भूमिज जाती के लोग ही संभाल रहे हैं वर्षों से पूजा की जिम्मेदरी|