“कुछ रिश्ते मुनाफ़ा नहीं देते, मगर ज़िन्दगी को अमीर बना देते हैं”

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झारखण्ड: पूर्व शिक्षक गंगाधर पासवान बताते हैं,एक पेड़ ऐसा लगाइए जिसमे इंसानियत, मानवता,करुणा,के फल हो “फरेब” नही अच्छे व्यवहार का आर्थिक मूल्य भले ही न हो,लेकिन अच्छा व्यवहार करोड़ों दिलों को खरीदने की ताकत रखता है,और अगर बात दोस्ती की हो तो ,हमारे समय में भी दोस्ती होता था, और होते थे ऐसे लोग, स्वर्गीय कृष्ण अग्रवाल जैसे लोग। समय के साथ, जिंदगी में नए लोग आए, नए अनुभव मिले, लेकिन उनकी दोस्ती वैसी ही रही – एक अनकही, अनमोल, और बेमिसाल दोस्ती। हमने जीवन में बहुत सारे बदलाव देखे। बहुत जल्द परिवर्तन को देखा है। ज़िन्दगी के बीहड़ चढ़ावों-उतारों से गुज़रते हुए अक्सर कुछ प्रिय लोग, कुछ प्रिय चीज़ें पीछे छूट जाती हैं, या कहीं खो जाती हैं, हमारे जमाने में दोस्ती को कुछ अलग रूप से देखा जाता था। अब उसे किस्म के व्यक्ति कहां मिलते हैं? वह पुराने लोग अब मिलना एक विरल और दुर्लभ चीज़ है,अध्यापक रह चुके पासवान जी का मानना हैं। जीवन एक ट्रेन की तरह है जिसमे मेहनत, एकाग्रता, भाग्य, सुख-दुख जैसे कई डिब्बे है और इन सब डिब्बों को आगे बढ़ाने के लिए आत्मविश्वास और स्वर्गीय कृष्ण अग्रवाल जैसे सच्चा दोस्त बहुत जरूरी है। स्वर्गीय कृष्ण अग्रवाल, एक मिलनसार एवं दयालु किस्म के व्यक्ति थे। उनकी पहचान यहां के ग्रामीण क्षेत्र में सभी लोगों के साथ थी साथ ही साथ पारिवारिक रिश्ता जोड़कर वह जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते थे हर लोग उन्हें अपना रिश्तेदार नजर आता था लोग भी उन्हें काफी प्यार से अपने रिश्तेदार का तरह ही इज्जत करते थे हर समय सेवा भावना मन में रहती थी एवं सेवा कर कर वह किसी को बताते भी नहीं थे उनकी सेवा सच्ची सेवा थी वह लोगों की मदद करते थे, 1966 मातमडीह विद्यालय कलकापुर से अपनी पेशा की शुरुआत करने वाले शिक्षक गंगाधर पासवान जी है, 2009 में आसानबनी विद्यालय से रिटायर किया। इनकी दोस्ती इनके इंसानियत उनके व्यवहार का आज भी लोग मिसाल देते हैं। सच है, वक़्त कभी रुकता नहीं है। आज की तारीख में जब भी आप अपने से या साथी से मिलें तो ऐसे मिलें जैसे आप उससे आखरी बार मिल रहे हों,यकीन मानिए न आप उसको कभी छोड़ पाएंगे और न वो कभी आपको छोड़ पायेगा। क्योंकि आपकी ज़िंदगी की सच्ची दौलत यही लोग हैं।

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Author: Desh Live News

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