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current post: राजधानी रांची में एक निजी अस्पताल का अमानवीय चेहरा सामने आया है,जहां मृत नवजात को पैसा के लिये अस्पताल में रखा गया भर्ती।, ID: 7544
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रांची : राजधानी रांची के अरगोड़ा में बच्चा केयर हॉस्पिटल में एक नवजात को इंफेक्शन के कारण भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान नवजात की मृत्यु हो गयी थी लेकिन अस्पताल प्रबन्धन ने मृत बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखा ताकि परिजनों से अस्पताल की मोटी फीस वसूली जा सके।
बच्ची के पैरेंट्स बार बार अपनी बच्ची से मिलने की बात करते थे तो हॉस्पिटल कर्मी उसे देखने तक नहीं दे रहे थे।बाद में पैरेंट्स के जिद से जब बच्ची को दिखाया गया तो उस बच्ची का मांस गलना शुरू हो गया था अब आप सोचिए की तुरंत मरने के बाद मांस कैसे गलेगा। इसका मतलब साफ है कि बच्ची पहले मर चुकी थी लेकिन हॉस्पिटल के मालिक द्वारा पैसा हड़पने हेतु बोला जा रहा था की आपकी बच्ची वेंटीलेटर पर है।जबकि बचा 05 दिन पहले ही मर चुका था।जहां अंत मे परिजनों ने समाजसेवी संस्था सन्मार्गम फाऊंडेशन के सहयोग से अरगोड़ा थाना में FIR दर्ज करा दिया । बताया जा रहा है कि राजधानी रांची के हरमू थाना क्षेत्र के सुखदेव नगर निवासी मुकेश कुमार की बेटी का जन्म सदर अस्पताल रांची में पिछले 04 जुलाई को हुआ था,जहां के डॉक्टरों ने नवजात बेटी को इंफेक्शन हो जाने के कारण इसके बेहतर ईलाज के लिए लिटिल हार्ट न्यू बॉर्न एन्ड चाइल्ड हार्ट सेंटर अस्पताल में रेफर कर दिया गया था। जहां परिजनों ने 08 जुलाई को ही बच्ची को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया और बच्ची का ईलाज शुरू किया गया।इस दौरान डॉक्टरों के द्वारा परिजनों से दवाई और खून मांगाया जाता रहा लेकिन परिजनों को बच्ची से मिलने नही दिया गया।

जहां 15 दिन बीत जाने के बाद भी न तो बच्ची से मिलने दिया जा रहा था और न ही बच्ची की स्थिति बताया जा रहा था जिससे परिजन काफी परेशान हो गए और जब थक कर बच्ची से मिलने का जिद किया जाने लगा तो अस्पताल के संचालक आशुतोष शर्मा के द्वारा परिजनों को यह कहकर डराया गया कि जो कहते हैं करते जाए नही तो बच्ची को कुछ हो जाएगा तो अस्पताल उसका रिस्क नही लेगा। लेकिन 30 जुलाई को नवजात के परिजन बच्ची से मिलने का जिद करने लगे तब अस्पताल प्रबन्धक आसुतोष चौधरी और एक डॉक्टर सत्यजीत कुमार द्वारा बताया गया की बच्ची की स्थिति ठीक नही है इसे दूसरे जगह रेफर करना होगा,इसके लिए कागजात पर परिजनों से हस्ताक्षर करने ला दवाब बनाया जाने लगा जहां बच्ची को बिना देखे कागज पर हस्ताक्षर करने से परिजनों ने मना कर दिया ।जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि आपलोग साइन कीजिये बच्ची को दे रहे हैं। तब बच्ची को बाहर निकालकर गॉड में दिया गया जहां बच्ची पहले से ही मृत थी। बच्ची को देखकर लगा को बच्ची की मृत्यु 05-06 दिन पहले ही हो चुकी है।फिर भी अस्पताल के द्वारा इसके ईलाज पर परिजनों से पैसा ठगा जाता रहा।
इस मामले को लेकर परिजनों के साथ स्वयंसेवी सामाजिक संस्था सन्मार्ग फाउंडेशन के द्वारा रांची के अरगोड़ा थाना में लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज कराया गया है और अस्पताल के संचालक आशुतोष शर्मा और डॉक्टर सत्यजीत कुमार को नामज़द आरोपी बनाते हुए इस कुकृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।
साथ ही सन्मार्गम फाऊंडेशन ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से इस मामले को गंभीरता से ले कर आरोपी अस्पताल प्रबंधन और इस घटना में संलिप्त डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह से फिर किसी असहाय और मजबूर गरीब लोगों का शोषण ना हो सके।
Author: Desh Live News



