पश्चिम बंगाल से प्रचलित मां मनसा देवी की पूजा की शुरुआत, चांद सौदागर ने किया था। मान्यता है कि मां को चढ़ावा देने के लिए बतख और बखरा परंपरागत चले आ रहे हैं।

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सरायकेला, झारखंड : पश्चिम बंगाल राज्य के साथ झारखंड राज्य में नागो की देवी मां मनसा की पूजा अर्चना श्रावण माह सांकृतिक से शुरू होकर आसीन माह के सांकृतिक डाक तक मां मनसा देवी की पूजा अर्चना बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। यह पूजा अर्चना चाँद सौदागर पूर्वी भारत के चंपकनगर के एक प्रसिद्ध व्यापारी थे। असमिया और बंगाली दोनों ही उन्हें अपने-अपने समुदायों से संबंधित बताते हैं, विकिपीडिया के अनुसार चाँद सौदागर चंद्रधर. 200-300 ई. पूर्व चंपकनगर, पूर्वी भारत प्राचीन व्यापारी चांद सौदागर द्वारा प्रचलित हुआ था। उसके प्रश्चात नगर वासी करने लगा और सभी लोगों का मां मनसा देवी मनोकामना पूरी करती है।हालाकि आज दो राज्य में मां मनसा देवी की पूजा अर्चना धूमधाम से होती है। मां को चढ़ावा देने के लिए बख़रा और हंस/बतख की बलि दी जाती है।

आज सरायकेला खरसांवा जिला के ईचागढ़ गांव में बतख की कारोबार में विगत 8 वर्षों बीरबल खान रामगढ़ के निवासी द्वारा ओल्ड थाना ईचागढ़ के टोला पुरानडीह के नजदीक एक हजार की बतख लेकर शुरुआत किया था। जो आज दो से तीन हजार बतख का पालन करने लगा हैं।जिसके देख रख में लगभग 6 आदमी रखा गया हैं।प्रतिदिन हजार रुपया का धान बतख खा जाते हैं।

बारों महीना बतख का कारोबार करते है । बतख की साइज 1 किलो 200 ग्राम 1 किलो 800 ग्राम के आसपास होता है। एक सो रुपया से आज के 300 /400 रुपया की दर से खरीद बिक्री होता है। बतख को स्थानीय पाइकर हॉकर द्वारा विभिन्न मार्केट में ले जाकर बेचते हैं।मनसा पूजा में सबसे ज्यादा बिक्री होती हैं। जिससे इसका रेट बढ़ जाता हैं। बतख आंद्रा प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बनारस से भी लाया जाता है। इस बतख के कारोबार में अच्छी खासी आमदनी होती है।

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Author: Desh Live News

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