The ad is not displayed on the page
current post: सरायकेला गम्हरिया के प्राचीन धार्मिक स्थल घोड़ाबाबा में आखान जात्रा पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब सुबह से ही जुटते रहे श्रद्धालु जाने क्या है इस स्थल की धार्मिक मान्यता और क्यों हर साल आखान जात्रा में जुटते हैं श्रद्धालु l, ID: 2141
Ad: Ad created on January 26, 2026 2:51 am (11260)
Placement: Before Content (11261)
Display Conditions
| Ad | wp_the_query | |
|---|---|---|
| term_id | 0 | |
| taxonomy | 0 | |
| is_main_query | 1 | 1 |
| is_rest_api | 1 | |
| page | 0 | 1 |
| numpages | 0 | 1 |
| is_archive | 0 | |
| is_search | 1 | |
| is_home | 1 | |
| is_404 | 1 | |
| is_attachment | 0 | |
| is_singular | 0 | 1 |
| is_front_page | 1 | |
| is_feed | 0 |
| Ad | wp_the_query |
|---|---|
| term_id: is_archive: |
| Ad | wp_the_query |
|---|---|
| 5 | 9 |
Find solutions in the manual
गम्हरिया

सरायकेला जिले के गम्हरिया स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल घोड़ाबाबा मंदिर में बुधवार अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. आदित्यपुर- कांड्रा एक्सप्रेस हाइवे किनारे अवस्थित घोड़ाबाबा आस्था का केंद्र रहा है. यहां से गुजरने वाले हर श्रद्धालु नतमस्तक होकर भगवान से दुआएं मांगते हैं. हर साल मकर संक्रांति के बाद वाले अखान यात्रा के दिन यहां धूमधाम से घोड़ाबाबा पूजनोत्सव आयोजित की जाती है. मान्यता है कि श्रद्धालु घोड़ा बाबा से जो भी मन्नत मांगते घोड़ा बाबा उसे पूरा करते हैं. मन्नतें पूरी होने के बाद श्रद्धालु मिट्टी के बने जोड़ा घोड़ा चढ़ाते हैं. यही कारण है कि घोड़ाबाबा हर जाति एवं संप्रदाय के बीच काफी लोकप्रिय हैं. गम्हरिया कुंभकार समाज द्वारा मंदिर परिसर की देखरेख व रखरखाव एवं पूजनोत्सव आयोजित किया जाता है. घोड़ाबाबा मंदिर का प्रसाद घर ले जाना वर्जित है. पूजनोत्सव के दिन हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में बैठकर प्रसाद खाते हैं. कुंभकार समाज के अध्यक्ष मनोरंजन बेज ने बताया कि वार्षिक पूजनोत्सव के दिन यहां आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. हर साल इसकी संख्या बढ़ती है. उन्होंने कहा कि तीन सौ साल पहले गांव में हैजा फैली थी. पूर्वजो के मान्यता के अनुसार रात के समय घोड़ा दौड़ने की आवाज सुनाई पड़ती थी. उसी समय घोड़ाबाबा की कृपा पाने और उन्हें खुश करने के लिए गांव के बाहर घोड़ाबाबा मंदिर की स्थापना की गई थी. घोड़ाबाबा गांव के लोगों को बीमारी एवं आपदा से रक्षा करते हैं. अखान जात्रा के बाद गांव में शादी- विवाह होता हैं l



